Kyun Ki Saas Kabhi Bahu Thi 28th December 2025 Written Update: तुलसी की वापसी ने पलट दी बाज़ी, नोइना और मिहिर के बीच मचा तूफान

Aman Rai
14 Min Read
Kyun Ki Saas Kabhi Bahu Thi 28th December 2025 Written Update: तुलसी की वापसी ने पलट दी बाज़ी, नोइना और मिहिर के बीच मचा तूफान

Kyun Ki Saas Kabhi Bahu Thi 28th December 2025 Written Update: आज के एपिसोड की शुरुआत एक रहस्यमयी माहौल के साथ होती है, जब तुलसी वैष्णवी और बाकी लड़कियों को आवाज़ देती हैं, लेकिन कोई भी बाहर नहीं आता। इस पर वह हैरान रह जाती हैं और यह जानने की कोशिश करती हैं कि आखिर सभी अचानक कहाँ गायब हो गए।

उधर, वैष्णवी अपनी सहेलियों के साथ मिहिर की तलाश में हेरिटेज रिज़ॉर्ट पहुँचती है। रिसेप्शन पर पहुँचते ही हालात गर्मा जाते हैं, क्योंकि वैष्णवी को मिहिर का नाम तक पता नहीं होता और वह केवल उसके हुलिए के आधार पर उसे पहचानने की कोशिश करती है। रिसेप्शनिस्ट किसी भी तरह की जानकारी देने या उन्हें अंदर जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर देती है, जिसके बाद काउंटर पर हल्का हंगामा खड़ा हो जाता है।

इसी दौरान वैष्णवी की नज़र पार्थ पर पड़ती है, जिसके हाथ में उसकी डिज़ाइन की गई किताब होती है। वह उसे तुरंत पहचान लेती है और सबके सामने चोर बताकर हंगामा खड़ा कर देती है। इसके बाद पार्थ और वैष्णवी के बीच नोकझोंक और हल्की-फुल्की तकरार शुरू हो जाती है, जहां पार्थ बार-बार खुद को बेगुनाह बताता है। जब सभी उससे किताब उसके पास होने की वजह पूछते हैं, तो पार्थ दावा करता है कि वह दरअसल किताब लौटाने ही आया था और संयोग से वहीं सब मिल गए। हालांकि वैष्णवी उसकी बात पर भरोसा नहीं करती और उसे पकड़े जाने के बाद झूठ बोलने का आरोप लगाती है, जबकि उसके दोस्त भी उसे चोरी के लिए फटकार लगाते हैं।

हालात तब और बिगड़ जाते हैं जब पार्थ सवाल करता है कि आखिर सभी उसके पीछे क्यों पड़े हैं, जिस पर वैष्णवी पलटकर कहती है कि उसके पास उसका कोई पता या नंबर ही नहीं था, तो वह किताब लौटाता कैसे। इसी बीच वंदना पुलिस बुलाने की बात कह देती है, जिससे पार्थ घबरा जाता है और उन्हें रोकने की कोशिश करता है। मौके का फायदा उठाते हुए वैष्णवी किताब छीनकर भाग जाती है, जबकि पार्थ उसके पीछे-पीछे दौड़ पड़ता है।

इसी बीच तुलसी भी वैष्णवी की तलाश में हेरिटेज रिसॉर्ट पहुँच जाती है। वह मानती है कि वैष्णवी हाल के दिनों में काफी बागी हो गई है और बाकी लड़कियों को भी गलत राह पर ले जा रही है। तुलसी को इस बात की शिकायत रहती है कि कम से कम जाने से पहले वैष्णवी को उसे जानकारी तो देनी ही चाहिए थी।

उधर, रिसॉर्ट के दूसरे गलियारे में मिहिर शोभा से फोन पर बात करता नजर आता है और उसे चिंता न करने का भरोसा दिलाता है। कॉल खत्म होने के बाद वह अपने दिल की हालत पर सोचता है और महसूस करता है कि उसे काफी समय से सच्ची खुशी का एहसास नहीं हुआ है। इसी दौरान जब मिहिर और तुलसी एक ही गलियारे से गुजरते हैं, तो अचानक आई हवा की एक झोंका मिहिर को तुलसी की मौजूदगी का अहसास करा देता है। वह बीती यादों में खो जाता है और अनजाने में उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान आ जाती है।

इसी दौरान जब वैष्णवी वहाँ से जाने लगती है, तो पार्थ उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लेता है। इस पर वैष्णवी नाराज़ हो जाती है और उसकी सहेलियाँ एक बार फिर पार्थ को फटकार लगाती हैं। हालात संभालते हुए पार्थ सिर्फ दो मिनट बात करने की गुहार लगाता है, जिस पर वैष्णवी उसे जल्दी अपनी बात रखने को कहती है।

इसके बाद पार्थ सफाई देते हुए कहता है कि यह सब एक बड़ी गलतफहमी थी और वह नए सिरे से शुरुआत करना चाहता है। वह वैष्णवी के डिज़ाइनों की तारीफ करता है और दावा करता है कि अगर वह चाहे तो वह उसके काम को बड़े खरीदारों तक पहुँचा सकता है। यहां तक कि वह पैसे देने की पेशकश भी कर देता है। लेकिन वैष्णवी उसे तुरंत रोक देती है और याद दिलाती है कि पहले उसने उसकी किताब चुराई और अब उसके डिज़ाइन खरीदने की बात कर रहा है। वह बताती है कि ये डिज़ाइन उसने खास तौर पर कच्छ मेले के लिए बनाए थे और किताब खो जाने के बाद वह कई दिनों तक रोती रही थी। वैष्णवी साफ कर देती है कि वह न तो अपने डिज़ाइन बेचना चाहती है और न ही किसी को अपने विचारों की नकल करने देना चाहती है। वह जोर देकर कहती है कि उसके डिज़ाइन कॉपीराइटेड और पूरी तरह हस्तनिर्मित हैं, जिन्हें कोई और दोहरा नहीं सकता। आखिर में वह पार्थ को उसके पैसे अपने पास रखने और उसके डिज़ाइनों को भूल जाने की हिदायत देकर वहां से चली जाती है, पार्थ उसे हैरानी में देखता रह जाता है।

इसके बाद तुलसी आखिरकार लड़कियों को ढूंढ लेती है और उनसे सवाल करती है कि वे अचानक कहाँ चली गई थीं। इस पर वैष्णवी सफाई देते हुए कहती है कि उन्हें किसी को डांटना नहीं चाहिए, क्योंकि वह सबको साथ लेकर ही आई थी और उसकी किताब भी सुरक्षित वापस मिल गई है। तुलसी पूछती है कि क्या किताब पाने के लिए किसी से झगड़ा हुआ था, लेकिन वैष्णवी सच्चाई छिपाते हुए इनकार कर देती है। वह तुलसी को याद दिलाती है कि उन्हें मेले की तैयारियाँ पूरी करनी हैं, जिसके बाद तुलसी भी उनके साथ आगे बढ़ जाती है।

उधर, गलियारे में अकेले चलते हुए मिहिर के मन में एक ही सवाल घूमता रहता है कि आखिर तुलसी के आसपास होने पर उसे हर बार वही पुराना एहसास क्यों होने लगता है।

इस बीच ऋतिक, मिताली को कड़ी फटकार लगाते हुए कहता है कि उसके गैर-जिम्मेदाराना कदमों ने कंपनी को गंभीर संकट में डाल दिया है। मिताली सफाई देती है कि चूंकि डिज़ाइन उनके पास थे, इसलिए वे उनकी नकल कर सकते थे, लेकिन हालात बिगड़ते देख उसे उन्हें जल्दी लौटाना पड़ा। तभी पार्थ बीच में दखल देते हुए सभी को चेतावनी देता है कि कोई भी कदम उठाने से पहले सोचें, क्योंकि वे डिज़ाइन कॉपीराइटेड हैं और उनकी नकल करने की कोशिश कानूनी मुसीबत में डाल सकती है।

ऋतिक का कहना है कि इस पूरे विवाद से कंपनी की साख पर बुरा असर पड़ रहा है। इस पर मिताली तंज कसते हुए कहती है कि कंपनी पहले से ही घाटे में है और कम से कम वह शानदार डिज़ाइन तो लेकर आई थी। हालांकि ऋतिक उसे तुरंत याद दिलाता है कि वह डिज़ाइन लेकर नहीं आई, बल्कि चुराकर लाई थी। वह पार्थ से भी सवाल करता है कि किताब लौटाते वक्त उसने मामला सही तरीके से क्यों नहीं संभाला।

इसी दौरान ऋतिक बड़ा खुलासा करता है कि मिताली ने ये डिज़ाइन मुंबई के एक निवेशक को पहले ही भेज दिए थे, जिन्हें वे काफी पसंद आ गए हैं, जिससे हालात और पेचीदा हो गए हैं। समाधान के तौर पर माफी मांगकर यह कहने का सुझाव दिया जाता है कि डिज़ाइन गलती से भेजे गए थे, लेकिन नोइना इसे खारिज करते हुए कहती है कि इससे उनकी छवि गैर-पेशेवर लगेगी। उसका मानना है कि एक डिज़ाइन भेजकर फिर पीछे हटना उनकी साख को और ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा।

उधर, मिहिर ज़ोर देकर कहता है कि उन्हें किसी भी हाल में उन लड़कियों से असली डिज़ाइन हासिल करने होंगे। पार्थ जानकारी देता है कि लड़कियाँ कच्छ मेले में एक प्रदर्शनी में जाने की बात कर रही थीं, जिससे यह तय माना जा रहा है कि वे वहीं मिलेंगी। नोइना भी वहां जाने पर सहमति जताती है, हालांकि ऋतिक को चिंता होती है कि इतने बड़े मेले में उन्हें ढूंढना आसान नहीं होगा। इस पर नोइना आत्मविश्वास के साथ कहती है कि हो सकता है वहां उन्हें और भी बेहतरीन डिज़ाइन मिल जाएँ। अंत में मिहिर फैसला करता है कि सभी को तुरंत कच्छ मेले के लिए निकलना चाहिए।

कच्छ मेले में वैष्णवी अपनी टीम के साथ स्टॉल लगाने में जुटी होती है। इसी बीच मिहिर वहां पहुंचता है और बाकी लोगों को आगाह करता है कि लड़कियां उन्हें पहले से ही पसंद नहीं करतीं, इसलिए वह खुद उनसे अकेले में बात करना बेहतर समझता है। नोइना भी साथ चलने की ज़िद करती है, यह कहते हुए कि लड़कियों ने उसे पहले कभी नहीं देखा, लेकिन मिहिर उसे पीछे रुकने के लिए कह देता है।

इसके बाद मिहिर सीधे लड़कियों के स्टॉल पर पहुंचता है और उनके काम की तारीफ करते हुए बातचीत की शुरुआत करता है। वंदना को यह देखकर खुशी होती है कि कोई उनके हुनर को सराह रहा है। मिहिर उनके ब्रांडेड कलेक्शन की भी खुलकर तारीफ करता है और जानना चाहता है कि यह आइडिया किसका था। इस पर लड़कियां बताती हैं कि इस पूरे कॉन्सेप्ट के पीछे उनकी मौसी तुलसी का दिमाग है।

इसी दौरान वैष्णवी वहां पहुंचती है और मिहिर को देखकर हैरान रह जाती है। वह सीधे तौर पर उस पर आरोप लगाती है कि अब उसे सच्चाई पता चल चुकी है कि उसकी किताब उसके ही परिवार द्वारा चुराई गई थी। इस पर मिहिर सबसे पहले माफी मांगते हुए मामला शांत करने की कोशिश करता है, लेकिन वैष्णवी पलटकर कहती है कि माफी की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आखिरकार उसी ने किताब लौटाकर उसकी मदद ही की थी।

इसके बाद मिहिर अपनी असली मंशा सामने रखता है। वह कहता है कि उसे उनका कलेक्शन बेहद पसंद आया है और वह उनके डिज़ाइन खरीदना चाहता है। वह यह भी मानता है कि वैष्णवी इस वक्त नाराज़ और परेशान है और उसकी जगह कोई भी होता तो वही महसूस करता। मिहिर के मुताबिक, यह सौदा सभी के लिए फायदेमंद होगा—लड़कियों को उनकी मनचाही कीमत मिलेगी, उसे वो डिज़ाइन मिल जाएंगे जिनकी वह तलाश कर रहा है और इस तरह पूरा विवाद भी खत्म हो जाएगा।

हालांकि वैष्णवी साफ कर देती है कि वह अकेले कोई फैसला नहीं ले सकती। वह कहती है कि आज वे जो कुछ भी हैं, वह उनकी मौसी तुलसी की वजह से है और उसके बिना कोई भी निर्णय संभव नहीं। इस पर मिहिर कहता है कि जरूरत पड़ी तो वह खुद तुलसी से बात करने को तैयार है। आखिरकार वैष्णवी वंदना से अपनी मौसी को फोन करने के लिए कहती है, जिससे कहानी एक नए मोड़ की ओर बढ़ती है।

इसके बाद तुलसी वैष्णवी से साफ शब्दों में कहती है कि अगर वह मुंबई की प्रदर्शनी में जाना चाहती है तो जा सकती है, लेकिन उसे यह भी सीखना होगा कि किसी पर जरूरत से ज्यादा निर्भर न रहे। इस पर वैष्णवी भावुक होकर कहती है कि वह तुलसी के बिना कुछ भी नहीं कर सकती। जवाब में तुलसी उसे समझाती है कि जिंदगी में कोई भी इंसान इतना अहम नहीं होना चाहिए कि उसकी वजह से आपकी खुशियां कम हो जाएं।

इसी बीच मिहिर वैष्णवी से मिलता है और उसकी मौसी के बारे में पूछताछ करता है, जबकि पास खड़ी नोइना इस पूरे दृश्य को बढ़ते तनाव के साथ देखती रहती है।

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