Seher Hone Ko Hai 29th December 2025 Written Update: एपिसोड की शुरुआत में माहौल उस वक्त भारी हो जाता है, जब कौसर सेहर को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करती नजर आती है। सेहर रोते हुए अपनी बात रखने की कोशिश करती है, लेकिन कौसर साफ कह देती है कि वह कुछ भी सुनने के लिए तैयार नहीं है। इसी दौरान सेहर बताती है कि परवेज़ ने उससे वादा किया था कि शादी के बाद वह कौसर के लिए अलग नया घर खरीदेगा और उसे इस रिश्ते की तकलीफों से छुटकारा दिलाएगा।
कौसर सीधे सवाल दागती है कि क्या सेहर ने सिर्फ अपनी आज़ादी के लिए माहिद से शादी करने का फैसला कर लिया है और क्या वह डॉक्टर बनने का अपना सपना भूल चुकी है। सेहर साफ लफ्ज़ों में कहती है कि उसने अपना सपना नहीं छोड़ा है, वह आज भी डॉक्टर बनना चाहती है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हालांकि वह यह भी मानती है कि माहिद अपने बीते दर्द की वजह से बहुत परेशान है।
इस पर कौसर दो टूक कहती है कि माहिद ने बचपन में जो कुछ झेला, उससे उसे कोई सरोकार नहीं है। उसे सिर्फ सेहर के आने वाले भविष्य की फिक्र है। सेहर जवाब देती है कि जब कोई इंसान अपना दर्द उसके साथ साझा कर रहा हो, तो वह उसके साथ अमानवीय व्यवहार नहीं कर सकती। कौसर समझाते हुए कहती है कि इस ज़माने में इस उम्र में आंखें मूंद लेना आसान नहीं होता। इसके बाद कौसर सेहर को अपने पुराने ज़ख्मों के निशान दिखाती है और बताती है कि उसने महज़ 16 साल की उम्र में परवेज़ से शादी करने के बाद कितना दर्द सहा है। वह कहती है कि अगर उसका जन्म फरीद के घर में हुआ होता तो वह बिना किसी रुकावट के अपने सपनों को पूरा कर सकती थी, लेकिन किस्मत ने उसे परवेज़ के घर जन्म दिया। आख़िर में कौसर सेहर से कड़ा वादा लेती है कि वह न तो माहिद के प्यार में पड़ेगी और न ही उससे दोबारा मिलेगी। हालात के दबाव में सेहर यह वादा करने को मजबूर हो जाती है।
इसके बाद कहानी में एक और अहम मोड़ देखने को मिलता है, जब नाज़िमा चुपचाप नौकरानी को पैसे थमाती नजर आती है। नौकरानी नाज़िमा को भरोसा दिलाती है कि वह मौलाना के सामने उसका नाम नहीं खोलेगी। इस पर नाज़िमा राहत की सांस लेते हुए कहती है कि यही उसके लिए बेहतर है। तभी अचानक मौलाना वहां पहुंच जाते हैं। नाज़िमा झूठी बातों में उन्हें उलझाने की कोशिश करती है और हिसाब-किताब में मदद करने का दिखावा करती है।
उधर ताहिर, माहिद से बातचीत कर रहा होता है, तभी नाज़िमा उसे मौलाना की मदद के बहाने वहां से भेज देती है। बाद में वह माहिद से कहती है कि उसे मिट्टी के बर्तन बनाना सीखना अच्छा लगता है। इस पर माहिद सुझाव देता है कि वह मौलाना से बात करके मदरसे में लड़कियों के लिए ऐसा कोर्स शुरू करवा सकती है। नाज़िमा यह सुनकर डर जाहिर करती है और कहती है कि उसे मौलाना से बात करने की हिम्मत नहीं होती। वह याद दिलाती है कि किस तरह मौलाना ने पहले उसे दोषी ठहराया था। इसी बीच, ईश्वर की कृपा से नौकरानी सही वक्त पर सच उगल देती है। इसके बाद नाज़िमा को लगने लगता है कि पूरा मामला वैसा नहीं है जैसा दिखाया जा रहा है। उसे शक होने लगता है कि जरूर कुछ गड़बड़ है और किसी ने उसे जानबूझकर फंसाने की साजिश रची है। माहिद उससे सीधा सवाल करता है कि आखिर उससे किसकी दुश्मनी हो सकती है। जवाब में नाज़िमा सेहर का नाम लेती है, जिससे कहानी में नया तनाव पैदा हो जाता है।
आगे कहानी में माहिद नाज़िमा से साफ-साफ वजह पूछता है। इस पर नाज़िमा कबूल करती है कि उसे सेहर को देखकर जलन हो रही है और उसे शक है कि सेहर और माहिद के बीच कुछ चल रहा है। माहिद उसकी बात को आगे बढ़ाते हुए कहता है कि शक करना गलत नहीं है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। वह साफ कह देता है कि नौकर ने पूरी सच्चाई नहीं बताई और किसी ने सच छुपाने के लिए उसे पैसे दिए हैं, लेकिन वह सेहर नहीं हो सकती।
माहिद यहीं नाज़िमा की चाल को उजागर कर देता है और कहता है कि सेहर को फंसाने के लिए नौकर को पैसे उसी ने दिए थे। वजह साफ है—जलन। सेहर उसकी होने वाली पत्नी है और नाज़िमा इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही कि माहिद उससे शादी करने जा रहा है। हालांकि माहिद के पास नाज़िमा के खिलाफ कोई पक्का सबूत नहीं है, फिर भी वह उसे तमीज़ में रहने और हद में बात करने की सख्त चेतावनी देता है। उधर नाज़िमा मन ही मन सोचती है कि उसने सेहर को फंसाकर इस शादी को रोकने की चाल चली थी, लेकिन माहिद ने उल्टा उसे ही चेतावनी दे दी। इतना ही नहीं, माहिद खुलकर सेहर का साथ देता नजर आ रहा है, जिससे नाज़िमा की परेशानी और बढ़ जाती है।
इसी बीच फरीद कौसर को फोन कर बताता है कि उसने उनकी फ्लाइट का टिकट बुक कर लिया है। तभी परवेज़ वहां आ जाता है, जिसके चलते कौसर जल्दबाज़ी में फोन काट देती है। बाद में कौसर सेहर को हिदायत देती है कि वह मदरसे जाए और वहां किसी तरह की परेशानी खड़ी न करे। आगे माहिद आज़र को एक पतंग तोहफे में देता है, जिससे माहौल थोड़ी देर के लिए हल्का होता है। लेकिन कहानी फिर तनाव की ओर मुड़ जाती है, जब सेहर एक कमरे में छिपी हुई एक लड़की को देखती है। वह लड़की सेहर को बताती है कि उसके पिता एक बूढ़े आदमी से उसकी शादी तय करने की कोशिश कर रहे हैं और वह वहां से भागना चाहती है। वह सेहर से मदद की गुहार लगाती है। इसी दौरान कौसर, माहिद और फरीद के बीच हो रही बातचीत सुन लेती है, जिससे आने वाले एपिसोड में एक और बड़ा मोड़ आने के संकेत मिलते हैं।
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