EPFO new scheme for 2026: देश में करोड़ों कर्मचारी सालों तक मेहनत करने के बाद रिटायरमेंट के बाद पेंशन पर ही अपनी जिंदगी चलाते हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में जिस तेजी से महंगाई बढ़ी है, उस अनुपात में पेंशन की राशि में बढ़ोतरी नहीं हो पाई। इसका सीधा असर यह पड़ा कि बड़ी संख्या में बुजुर्ग अपनी रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतें तक पूरी नहीं कर पा रहे थे। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने इस गंभीर समस्या को संज्ञान में लिया है और अब पेंशन व्यवस्था में कुछ अहम बदलावों की तैयारी कर रहा है। ये बदलाव केवल कागजी ऐलान तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि आम पेंशनधारकों की जिंदगी पर सीधा असर डालने वाले बताए जा रहे हैं। जब दवाइयों से लेकर राशन तक हर चीज के दाम बढ़ रहे हों, ऐसे में पेंशन में बढ़ोतरी अब एक जरूरत बन चुकी है।
Pension Boost
ईपीएस-95 योजना के तहत फिलहाल न्यूनतम पेंशन महज़ एक हजार रुपये प्रति माह है, जो मौजूदा महंगाई के दौर में नाकाफी मानी जा रही है। आज के समय में इस राशि से बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। इसी को देखते हुए सरकार अब न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर साढ़े सात हजार रुपये प्रति माह करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह प्रस्ताव लागू होने की स्थिति में करीब 62 लाख पेंशनभोगियों को सीधा फायदा पहुंचाएगा। गौरतलब है कि पेंशन में आखिरी बड़ा बदलाव करीब दस साल पहले किया गया था, लेकिन तब से लेकर अब तक हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। बिजली, पानी, राशन और दवाइयों जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है। संसदीय समिति भी यह सिफारिश कर चुकी है कि पेंशन की राशि तय करते समय वास्तविक खर्चों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। अगर यह प्रस्ताव मई 2025 से लागू होता है, तो इससे बुजुर्गों को सम्मान और गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर मिल सकेगा।
DA Benefits
अब तक महंगाई भत्ते का लाभ केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित था, लेकिन अब EPFO पेंशनधारकों को भी इस सुविधा के दायरे में लाने की तैयारी की जा रही है। इसे एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक महंगाई भत्ता राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से जुड़ा रहेगा, यानी जैसे-जैसे बाजार में महंगाई बढ़ेगी, उसी अनुपात में पेंशन की राशि में भी स्वतः बढ़ोतरी होगी। इस भत्ते की हर छह महीने में समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इसमें संशोधन किया जाएगा। इससे पेंशनभोगियों की क्रय शक्ति बनी रहेगी और वे बढ़ती महंगाई का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे। साथ ही यह व्यवस्था पेंशनर्स को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा देगी और परिवार पर उनकी निर्भरता को भी कम करेगी।
New Digital EPFO
तकनीकी प्रगति ने ईपीएफओ की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला दिया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब 60 प्रतिशत से अधिक मामलों में भुगतान महज तीन दिनों के भीतर सीधे खातों में पहुंच रहा है, जबकि पहले इसी प्रक्रिया में हफ्तों甚至 महीनों तक का समय लग जाता था। उस दौर में लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब यह झंझट पूरी तरह खत्म हो चुका है।
मौजूदा डिजिटल सिस्टम के तहत लाभार्थी घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अपना क्लेम दर्ज कर सकते हैं। चाहे बच्चों की पढ़ाई हो, शादी का खर्च या फिर घर खरीदने के लिए धनराशि निकालनी हो, अब सब कुछ कुछ क्लिक में संभव हो गया है। सबसे बड़ी राहत यह है कि अब रद्द किए गए चेक की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है। यदि यूएएन यानी यूनिवर्सल अकाउंट नंबर केवाईसी से लिंक है, तो बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज के प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसके अलावा पेंशनधारक मोबाइल ऐप के माध्यम से कभी भी अपनी पेंशन से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। पूरी व्यवस्था स्वचालित होने से पारदर्शिता बढ़ी है और धोखाधड़ी की संभावनाएं काफी हद तक कम हुई हैं।
Pension Payments
दिसंबर 2024 से लागू की गई केंद्रीकृत पेंशन भुगतान प्रणाली ने पेंशनभोगियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस नई व्यवस्था के तहत अब 69 लाख से अधिक पेंशनर्स को समय पर और बिना किसी झंझट के पेंशन राशि मिल रही है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब पेंशनधारक देश के किसी भी कोने में स्थित किसी भी बैंक शाखा से अपनी पेंशन निकाल सकते हैं। पहले पेंशन के लिए एक निर्धारित बैंक पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे काफी असुविधा होती थी। खासकर वे बुजुर्ग जो अपने बच्चों के साथ अलग-अलग शहरों में रहते हैं या जो बैंक बदलना चाहते हैं, उनके लिए यह व्यवस्था किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही है। अब हर महीने तय तारीख पर पेंशन सीधे खाते में जमा हो जाती है और भुगतान में देरी की पुरानी समस्या लगभग खत्म हो चुकी है। साथ ही, पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर नियंत्रित होने से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार की संभावना भी काफी हद तक कम हुई है।
Secure Face Verification
अगस्त 2025 से ईपीएफओ में फेशियल ऑथेंटिकेशन यानी चेहरे की पहचान आधारित तकनीक को लागू कर दिया गया है, जिससे यूएएन बनाना और उसे अपडेट करना अब पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित और आसान हो गया है। पहले पहचान सत्यापन के लिए कई तरह के दस्तावेज जमा करने पड़ते थे और इस प्रक्रिया में हफ्तों का समय लग जाता था। लेकिन अब लाभार्थी को सिर्फ मोबाइल ऐप खोलकर एक सेल्फी लेनी होती है और कुछ ही मिनटों में पहचान सत्यापित हो जाती है। यह तकनीक न केवल प्रक्रिया को तेज बनाती है, बल्कि फर्जी दावों और धोखाधड़ी पर भी प्रभावी रोक लगाती है, जिससे कोई अन्य व्यक्ति किसी के नाम पर गलत तरीके से लाभ नहीं उठा सकता। इसके साथ ही गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स जैसे नए दौर के कामगारों को भी पहली बार ईपीएफओ के दायरे में शामिल किया गया है। इसे युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल माना जा रहा है।
Change Impact
इन सभी सुधारों का संयुक्त असर पेंशनभोगियों के जीवन में बड़े और सकारात्मक बदलाव के रूप में सामने आ रहा है। न्यूनतम पेंशन में प्रस्तावित बढ़ोतरी से बुजुर्गों को सीधी आर्थिक राहत मिलेगी और वे अधिक सम्मानजनक जीवन जी सकेंगे। महंगाई भत्ता उनकी क्रय शक्ति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा। वहीं, डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से समय की बचत हो रही है और पूरी प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा पारदर्शी बन गई है। चेहरे की पहचान आधारित तकनीक सुरक्षा को मजबूत कर रही है और धोखाधड़ी की संभावनाओं को लगभग खत्म कर रही है। ये सभी कदम इस बात का संकेत हैं कि सरकार और ईपीएफओ अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों की जरूरतों को लेकर गंभीर हैं। अधिकारियों के मुताबिक आने वाले समय में इन सुविधाओं को और बेहतर बनाने की योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं, ताकि हर पेंशनधारक को उसका पूरा अधिकार समय पर मिल सके।
Important Note: If you enjoyed this post, please follow our website. We provide the fastest updates, so follow us now to be the first to receive notifications of new updates…
